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आलाहजरत का तराना जब सुनाएगा दीवाना

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आलाहजरत का तराना जब सुनाएगा दीवाना

आलाहजरत का तराना

जब सुनाएगा दीवाना

सुनके सुन्नी मचलता रहेगा

आलाहजरत का डंका बजेगा


जब गुलामें रजा कि सवारी चले

देवबंदी के सीने पे आरी चले

जब वोह बनके रजा की कटारी

सांस भी देवबंदी की भारी चले


आला हज़रत का मस्ताना

जो रज़ा का है दीवाना

दुश्मनों से वो डट के कहेगा

आला हज़रत का डंका बजेगा।।


ले के नामे रजा मुस्कुराते रहो

आलाहजरत का नगमा सुनाते रहो

नाराए आलाहजरत लगाते रहो

जलने वालों को हर दाम जलाते रहो


सुन्नी इसका गम ना करना हर दम आगे बड़ते रहना

जलने वाला हमेशा जलेगा
आलाहजरत का डंका बजेगा।।


इल्मो हिक्मत का उसको खज़ाना मिला

जिसको अहमद रजा का ज़माना मिला

देखो ऐसा नक़ी का घराना मिला

खुलद का जिस जगह से ठिकाना मिला


ये ज़माने को सुनादो

सारी दुनियां को बतादो

अब तो रजवी ही सिक्का चलेगा

आला हज़रत का डंका बजेगा।।

 

खेत खलियान छीना रज़ा खान ने ?

क्या किसी का बिगाडा रज़ा खान ने ?

बल्कि,,, दीनो ईमां बचाया रज़ा खान ने

मुस्तफा ﷺ से मिलाया रज़ा खान ने


आला हज़रत को पहचानो,

उनको अपना जानो मानो,

तब ही सदका रज़ा का मिलेगा,

आला हज़रत का डंका बजेगा।।

 

आला हज़रत के जितने भी गद्दार हैं,

उनसे तन्हा ये लड़ने को तैय्यार हैं,

फौजे अहमद रज़ा के ये सालार हैं

मेरे शेरे रज़ा रज़वी तलवार हैं,


किस की हिम्मत है टकराए,

कोई अहमद को समझाए,

अब,, हक़ के हाथों से बातिल मिटेगा।।

आला हज़रत का डंका बजेगा।।

 

दुश्मनान ए नबी ﷺ को घटा दीजिए,

ख़ाक में उन सभो को मिला दीजिए,

उनको फारुकी तेवर दिखा दीजिए,

हशमती उनको तेवर दिखा दीजिए,

कान पे रख के घोड़ा दबा दीजिए,
आला हज़रत का शैदायी,

आला हज़रत का फिदायी,

उनके नक्शे क़दम पे चलेगा

आला हज़रत का डंका बजेगा।।


नाम ए अहमद रज़ा जिसको प्यारा नहीं,

ऐसा बकलोल हमको गवारा नहीं,

आला हज़रत का जिस लब पे नारा नही,

चाहे कुछ भी हो लेकिन हमारा नही,


चाहे हो कोई वहाबी,

चाहे हो कोई गुलाबी,

उससे रज़वी हमेशा लड़ेगा

आला हज़रत का डंका बजेगा।।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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