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ए आले नबी ख्वाजा औलादे अली ख्वाजा

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ऐ आले नबी, ख्वाजा औलादे अली, ख्वाजाहसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख्वाजाहाथों में तुम्हारे हो, मंशा-ए-वाली, ख्वाजा

ऐ आले नबी, ख्वाजा औलादे अली, ख्वाजा

हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख्वाजा

हाथों में तुम्हारे हो, मंशा-ए-वाली, ख्वाजा

हसनैन के गुलशन हो, ज़हरा की कली, ख्वाजा

 

बिगड़ी के बनाने में क्यों देर लगी, ख्वाजा

बिगड़ी के बनाने में क्यों देर लगी, ख्वाजा

 

दिन रात बनाते हो, खोटी को खड़ी, ख्वाजा

देवड़ी पे तेरे किस की जोली ना भरी, ख्वाजा

बरजस्ता नसीबों की तक़दीर फिरी, ख्वाजा

आँखें मेरी अब तक हैं चौखट पे धरी, ख्वाजा

 

बिगड़ी के बनाने में क्यों देर लगी, ख्वाजा

 

भर लेते हैं उस दर पर जोली को सभी, ख्वाजा

महरूम नहीं जाता कोई भी कभी, ख्वाजा

ले लूंगा मैं मुह मांगा चौखट पे अभी, ख्वाजा

उठेगा तो उठेगा सर मेरा जबही, ख्वाजा

बिगड़ी के बनाने में क्यों देर लगी, ख्वाजा

 

क्या शान तुम्हारी है, अल्लाहु गनी, ख्वाजा

दुनिया के धनी, ख्वाजा, उकबा के धनी, ख्वाजा

ज़र्रे को बनाते हो, लाले यमानी, ख्वाजा

क्या बात है जो अब तक मेरी ना बनी, ख्वाजा

बिगड़ी के बनाने में क्यों देर लगी, ख्वाजा

 

किस शान से महफ़िल की रौनक हो सजी, ख्वाजा

नशाद की जाती है दिन रात ग़मी, ख्वाजा

देखो ज़रा सैय्यद की आँखों की नमी, ख्वाजा

किस चीज की अख़िर है इस दर पे कमी, ख्वाजा

बिगड़ी के बनाने में क्यों देर लगी, ख्वाजा

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