मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
ज़माना छूटे, हम न छोड़ेंगे दर-ए-ग़रीब-नवाज़
ज़माना छूटे, हम न छोड़ेंगे दर-ए-ग़रीब-नवाज़
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
हमें नाज़ है बस तुझ पर, किसी और पे नाज़ नहीं
तेरे जैसा ज़माने में कोई बंदा-नवाज़ नहीं
तेरे देने दिलाने का अंदाज़ निराला है
किसी और का दुनिया में ऐसा अंदाज़ नहीं
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
ऐ चिश्त नगर वाले ! तुम मेरा भरम रख लो
सदक़े में मुहम्मद के हम सब पे करम कर दो
तुम हिन्द के राजा हो, अजमेर के दाता हो
हम चिश्ती ग़ुलामों का तुम ही तो सहारा हो
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
फ़रियाद मेरी सुन लो, ऐ हिन्द के महाराजा !
मैं आस लगाए हूँ, कभी मेरे भी घर आजा
तेरी शान पे मैं सदक़े, क़ुर्बान तेरे, ख़्वाजा !
ऐ इब्न-ए-सख़ी ख़्वाजा ! ऐ हिन्द-वली ख़्वाजा !
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
तेरे दर के भिकारी हैं, तेरे दर के ये मँगते हैं
धनवान है तू, ख़्वाजा ! तेरे टुकड़ों पे पलते हैं
तेरे आगे हमारी कुछ औक़ात नहीं, ख़्वाजा !
जो काम हमारे हैं, तेरे नाम से चलते हैं
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन !मु'ईनुद्दीन
कर अपने ग़ुलामों पर बस एक नज़र, ख़्वाजा !
आबाद ख़ुदा रखे तेरा चिश्त नगर, ख़्वाजा !
तेरी चौखट पर आ कर मँगतों ने पुकारा है
जाएँ तो कहाँ जाएँ तेरा छोड़ के दर, ख़्वाजा !
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
ज़माना छूटे, हम न छोड़ेंगे दर-ए-ग़रीब-नवाज़
ज़माना छूटे, हम न छोड़ेंगे दर-ए-ग़रीब-नवाज़
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन
मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन मु'ईनुद्दीन

दर-ए-ग़रीब-नवाज़
Muslim Life Pro App
Download
WhatsApp Group
Join Now






