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ए सब्ज़ गुम्बद वाले ! मंज़ूर दुआ करना

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ए सब्ज़ गुम्बद वाले ! मंज़ूर दुआ करना

ऐ सब्ज़ गुम्बद वाले मंज़ूर दुआ करना,
जब वक्त नज़ा आए दीदार अता करना।

मैं क़ब्र अंधेरी में घबराऊंगा जब तन्हा,
इमदाद मेरी करने आ जाना मेरे आक़ा (ﷺ),
रौशन मेरी तुरबत को ऐ नूर ए खुदा करना,
जब वक्त नज़ा आए दीदार अता करना।

मुजरिम हूं जहां भर का महशर में भरम रखना,
रुसवाए ज़माना हूं दामन में छुपा लेना,
मक़बूल दुआ मेरी महबूब ए खुदा करना।
जब वक्त नज़ा आए दीदार अता करना।

ऐ नूर ए खुदा आ कर आंखों में समा आना,
या दर पे बुला लेना या ख़्वाब में आ जाना,
ऐ पर्दा नशीं दिल के परदे में रहा करना,
जब वक्त नज़ा आए दीदार अता करना।

महबूब ए इलाही सा कोई न हसीं देखा,
ये शान है उनकी के साया भी नही देखा,
अल्लाह ने साए को चाहा न जुदा करना,
जब वक्त नज़ा आए दीदार अता करना।

चहरे से ज़िया पाई इन चांद सितारों ने,
उस दर से शिफा पाई दुख दर्द के मारों ने,
आता है उन्हे साबिर हर दुख के दवा करना,
जब वक्त नज़ा आए दीदार अता करना।

ऐ सब्ज़ गुम्बद वाले मंज़ूर दुआ करना,
जब वक्त नज़ा आए दीदार अता करना।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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