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करदो करदो करम मुर्शीद ए मोहतरम, तुम को भेजा गया है करम है।

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चराग ए चिश्त🕯️शहे औलिया ग़रीब नवाज़,बहारें अंजुमन ए मुस्तफा ﷺ गरीब नवाज़,सुनो सुनो हाजत रवा़ं गरीब नवाज़,मैं दे रहा हुं सदा पर सदा गरीब नवाज़।

चराग ए चिश्त🕯️शहे औलिया ग़रीब नवाज़,
बहारें अंजुमन ए मुस्तफा  ﷺ गरीब नवाज़,
सुनो सुनो हाजत रवा़ं गरीब नवाज़,
मैं दे रहा हुं सदा पर सदा गरीब नवाज़।


ख़्वाजा ए ख्वाजगां हामि ए बेकसां,
इल्तेजा सुन लो शाहे उमम के लिए,
करदो करदो करम मुर्शीद ए मोहतरम,
तुम को भेजा गया है करम है।


गर तुम ना करोगे तो करम कौन करेगा,
झोली मेरी तुम्हारे सिवा कौन भरेगा,

है तुम्हारी तलब हासिल ए बंदगी,
इससे बढ़ कर नही है इबादत कोई,
मेरे सजदे हैं ख़्वाजा ए खवाजगां,
बस तुम्हारे ही नक्शे कदम के लिए।


तेरा करम न हो तो कयामत है ज़िंदगी,
तेरा करम है जब तो सलामत है ज़िंदगी।


नूर ए शाह ए नजफ मेरे ख़्वाजा पिया,
तेरी चौखट पे वालियों ने सजदा किया,
खालिक ए दो जहां से ये रुतबा मिला,
तेरा दरबार फैज़ो करम के लिए।


किसी को क्यों हाल ए दिल सुनाए,
किसी को क्यों राज़दां बनाए,
तुम्ही से मांगेगे तुम्ही दोगे,
तुम्हारे ही घर से लौ🕯️लगी है,
ये सब तुम्हारा करम है ख़्वाजा,
के बात अब तक बनी हुई है।

शाहे अजमेर मेरा मसीहा है तू,
दर्द मंदों के दुख का मदावा है तू,
तेरी निस्बत का दामन रहे हाथ में,
बस दवा है यही रंजो गम के लिए।


अमल के अपने एहसास क्या है,
वजूद निदामत के प्यास क्या है,
रहे सलामत तुम्हारी निस्बत,
अपना तो बस आसरा यही है।


थामना हाथ ऐ सय्यदि मेहरबां,
है तेरा काम ख़्वाजा खता पोशियां,
लाज रखना फना की मोइन ए जहां,
हश्र में ताजदारे हरम के लिए।


जिसे आराम न हो सारे ज़माने से,
उठा ले थोड़ी तुम्हारे आस्ताने से…!!!

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