खिला मेरे दिल की कली गौस-ए-'आज़म
खिला मेरे दिल की कली गौस-ए-'आज़म
मिटा क़ल्ब की बेकली गौस-ए-'आज़म
मेरे चाँद में सदके आजा इधर भी
चमक उट्ठे दिल की कली गौस-ए-'आज़म
तेरे रब्ब ने मालिक किया तेरे जद्द को
तेरे दर से दुनिया पली गौस-ए-'आज़म
हमारा भी बेडा लगादो किनारे
तुम्हें ना-ख़ुदाई मिली गौस-ए-'आज़म
फ़िदा तुमपे हो जाए नूरी ये मुज़्तर
ये है इसकी ख्वाहिश-ए-दिली गौस-ए-'आज़म







