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महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहना

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महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहनासुलतान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहनातुझ पर ख़ुदा की रहमत, ए 'आज़िम-ए-मदीना !

महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहना
सुलतान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना

तुझ पर ख़ुदा की रहमत, ए 'आज़िम-ए-मदीना !
नूर-ए-मुहम्मदी से रौशन हो तेरा सीना
जब साहिल-ए-'अरब पर पहुँचे तेरा सफ़ीना
उस वक़्त सर झुका कर, लिल्लाह बा-क़रीना
उस ज़ात-ए-मुस्तफ़ा से मेरा सलाम कहना

महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहना
सुलतान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना

दरबार-ए-मुस्तफ़ा की हासिल हो जब हुज़ूरी
पेश-ए-नज़र हो जिस दम वो बारगाह-ए-नूरी
हो दूर रंज-ओ-कुल्फ़त, मिट जाए फ़िक्र-ए-दूरी
दीदार-ए-मुस्तफ़ा की जब आरज़ू हो पूरी
वश्शम्स की ज़िया से मेरा सलाम कहना

महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहना
सुलतान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना

राह-ए-तलब की लज़्ज़त जब क़ल्ब को मज़ा दे
'इश्क़-ए-नबी-ए-मुर्सल जब रूह को जिला दे
जब सोज़-ए-'आशिक़ाना जज़्बात को जगा दे
हस्ती का ज़र्रा ज़र्रा जब आह की सदा दे
'आलम के दिलरुबा से मेरा सलाम कहना

महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहना
सुलतान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना

साहिल पे आते आते मौजों को चूम लेना
मौजों के बा'द दिलकश ज़र्रों को चूम लेना
उस पाक सरज़मीं की राहों को चूम लेना
फूलों को चूम लेना, काँटों को चूम लेना
फिर नूर-ए-वद्दुहा से मेरा सलाम कहना

महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहना
सुलतान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना

रौज़े की जालियों के जिस दम क़रीब जाना
रो रो के हाल-ए-मुस्लिम सरकार को सुनाना
बेसाख़्ता मचलना, जोश-ए-जुनूँ दिखाना
सीने में भी बसाना, आँखों में भी बसाना
फिर नूर-ए-हक़-नुमा से मेरा सलाम कहना

महबूब-ए-किब्रिया से मेरा सलाम कहना
सुलतान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना


शायर:

अल्लामा शारिक़ इरायानी

ना'त-ख़्वाँ:

अश्फ़ाक़ अत्तारी - मेहमूद अत्तारी
अज़ीम अत्तारी - मदनी रज़ा अत्तारी

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