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सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

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ग्यारवीं वाले मेरे ग्यारवीं वालेइमदाद कुन इमदाद कुन अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीं और दुनिया शाद कुन या ग़ौसे आज़म दस्तगीर

सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

ग्यारवीं वाले मेरे ग्यारवीं वाले
ग्यारवीं वाले मेरे ग्यारवीं वाले

इमदाद कुन इमदाद कुन अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन
दर दीं और दुनिया शाद कुन या ग़ौसे आज़म दस्तगीर

मनाक़िब की महफ़िल सजाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे
नियाज़े अकीदत दिलाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

वो ग़ौसुल वरा जो अता-ए-नबी हैं
जो उश्शाक़ की जान और ज़िंदगी है
कि हम माल उन पर लुटाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

मुश्किलाते बेअदद दारे हम मां
अल मदद या ग़ौसे आज़म पीर मां

वो ग़ौसुल वरा जो मुसीबत को टालें
परेशान को अपने सीने लगा लें
इन्हें हाल दिल का सुनाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

छुटती है तो छुटे दुनिया
ग़ौस का दामन न छोड़ेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

खिला मेरे दिल की कली ग़ौसे आज़म
मिटा क़ल्ब की बे-कली ग़ौसे आज़म

कदम गर्दने औलिया पर है तेरा
है तू रब का ऐसा वली ग़ौसे आज़म

ये दिल ये जिगर है ये आँखें ये सर है
जहाँ चाहो रखो कदम ग़ौसे आज़म

हैं बग़दाद वाले सखावत में आला
कोई उनकी चौखट से खाली न लौटा
दरे ग़ौस से फ़ैज़ पाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

मनाक़िब की महफ़िल सजाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

शायल लिल्लाह या अब्दुल क़ादिर
या सक़ीनल बग़दाद या शेख़ अल जिलानी

मनाते हैं जो ग्यारवीं खुशदिली से
मोहब्बत जो करते हैं ग़ौसे जली से
क़यामत तलक जगमगाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

मनाक़िब की महफ़िल सजाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

प्यार है प्यार है ग़ौसुल अनाम से
ग्यारवीं मनाएंगे एहतिराम से

मेरे ग़ौस को रब ने बख्शा वो रुतबा
तराई है कश्ती किया मुर्दा ज़िंदा
करामात ये आसिम सुनाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

मनाक़िब की महफ़िल सजाते रहेंगे
सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

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