सरकार-ए-ग़ौस-ए-आज़म ! नज़रे करम खुदार
सरकार-ए-ग़ौस-ए-आज़म ! नज़रे करम खुदारा
मेरा खाली कासा भर दो, में फ़कीर हूँ तुम्हारा
जोली को मेरी भर दो, वरना कहेगी दुनिया
ऐसे सखी का मंगता, फिरता है मारा-मारा
सबका कोई न कोई, दुनिया में आसरा है
मेरा ब-जुज़ तुम्हारे, कोई नहीं सहारा
मीरां बने हैं दूल्हा, महफ़िल सजी हुई है
सब औलिया बाराती, क्या खूब है नज़ारा
ये अदा-ए-दस्तगीरी कोई मेरे दिल से पूछे
वहीँ आ गए मदद को, मैंने जब जहां पुकारा
ये तेरा करम है या ग़ौस , के बना लिया है अपना
कहाँ मुझसे ये कमीना, कहाँ सिलसिला तुम्हारा







