या रसूल अल्लाह तेरे दर की फज़ाओं को सलाम
या रसूल अल्लाह तेरे दर की फज़ाओं को सलाम
गुंबद-ए-ख़ज़रा की ठंडी ठंडी छाओं को सलाम
मस्जिद-ए-नबवी के सुभों और शामों को सलाम
या नबी ! तेरे ग़ुलामों के ग़ुलामों को सलाम
जो मदीने की गली कूचों में देते हैं सदा
उन फक़ीरों, राहगीरों, और गदाओं को सलाम
वालेहाना जो तवाफ़-ए-रौज़ा-ए-अक़्दस करे
मस्त-ओ-बे-ख़ुद वज्द करती उन हवाओं को सलाम
जो पढ़ा करते हैं रोज़-ओ-शब तेरे दरबार में
पेश करता है ज़हूरी उन सलामों को सलाम







