अये ख़ुदा ! क़िब्ला-ए-अव्वल की दु'आएं सुन ले
उनकी उजड़ी हुई बस्ती की सदाएं सुन ले
तू जो चाहे तो बुरा वक़्त भी टल जाएगा
रात की कोख से सूरज भी निकल आएगा
हम नहीं कहते हमें कोई पयम्बर दे-दे
तेरे ही आगे जुके हमको वही सर दे-दे
लश्कर-ए-फील जहालत पे उतर आया है
अये ख़ुदा ! फिर से अबाबील को कंकर दे-दे
कौन कहता है के नफरत से चलेगी दुनिया
तू दिखा दे के महोब्बत से चलेगी दुनिया
अये ख़ुदा ! क़िब्ला-ए-अव्वल की दु'आएं सुन ले
उनकी उजड़ी हुई बस्ती की सदाएं सुन ले
तेरे महबूब ने जिस सिम्त किये थे सजदे
हुक्म से तेरे वो असहाब-ए-नबी के सजदे
सैकड़ों ग़म लिए सीने में है ग़मग़ीन खड़ा
अब फ़क़त तेरे सहारे है फलस्तीन खड़ा
काश दुनिया ये समज पाती ये झगड़ा क्या है
आपके घर ये किसी और का क़ब्ज़ा क्या है
तू जो चाहे तो हर एक बात को बेहतर कर दे
एक नज़र डाल के हालात को बेहतर कर दे
अये ख़ुदा ! क़िब्ला-ए-अव्वल की दु'आएं सुन ले
उनकी उजड़ी हुई बस्ती की सदाएं सुन ले
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