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छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं

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छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं

छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं
मुस्तफा ग़ुलामों की, क़िस्मतें बदलते हैं
 
जिस दर पे ग़ुलामों के हालात बदलते हैं
आओ, उसी आक़ा के दरबार में चलते हैं
लिल्लाह ! बुला लीजिये, दुःख-दर्द के मारों को 
तैबा की ज़ियारत को, अरमान मचलते हैं
 
मुस्तफा ग़ुलामों की, क़िस्मतें बदलते हैं
छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं
 
रहमतों की चादर के, सर पे साये चलते हैं
मुस्तफा के दीवाने, घर से जब निकलते हैं
 
छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं
 
हरा गुम्बद जो देखोगे, तो दुनिया भूल जाओगे
अगर तैबा को जाओगे, तो आना भूल जाओगे
तुम्हारे सामने होगा, कभी जब गुम्बद-ए-ख़ज़रा
नज़र जब जाएगी उस पर, हटाना भूल जाओगे
 
हमको रोज़ मिलता है, सदक़ा आल-ए-ज़हरा का
पंजतन के टुकड़ों पर, खुशनसीब पलते हैं
 
छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं
 
ज़िक्र-ए-शाह-ए-बतहा को, विर्द अब बना लीजिये
ये वो ज़िक्र है जिस से, ग़म ख़ुशी में ढलते हैं
 
छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं
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Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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