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डरते नहीं किसी से कभी फ़ातिमा के लाल

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डरते नहीं किसी से कभी फ़ातिमा के ला'लकैसे डरें ! हैं ख़ून-ए-'अली, फ़ातिमा के ला'लइक दूध पीते बच्चे को क़ुर्बान कर दियायूँ तीर खाया, तीर को हैरान कर दिया

डरते नहीं किसी से कभी फ़ातिमा के ला'ल
कैसे डरें ! हैं ख़ून-ए-'अली, फ़ातिमा के ला'ल

इक दूध पीते बच्चे को क़ुर्बान कर दिया
यूँ तीर खाया, तीर को हैरान कर दिया
तारीख़ लिख गए हैं नई फ़ातिमा के ला'ल
डरते नहीं किसी से कभी फ़ातिमा के ला'ल

बोले हुसैन देखना ये मुझ को है यक़ीं
नाना के मेरे दीन का बिगड़ेगा कुछ नहीं
ए कूफ़ियो ! ज़िंदा हैं अभी फ़ातिमा के ला'ल
डरते नहीं किसी से कभी फ़ातिमा के ला'ल

पाँव लरज़ रहे थे हर इक पहलवान के
लाले पड़े थे फ़ौज-ए-यज़ीदी की जान के
लड़ते थे ऐसे शेर-ए-'अली, फ़ातिमा के ला'ल
डरते नहीं किसी से कभी फ़ातिमा के ला'ल

मरते नहीं शहीद कभी सच है, ए ताहिर !
मुर्दा कहेगा जो उन्हें, हो जाएगा काफ़िर
माँगो मदद, करेंगे अभी फ़ातिमा के ला'ल
डरते नहीं किसी से कभी फ़ातिमा के ला'ल


शायर:

ताहिर रज़ा रामपुरी

ना'त-ख़्वाँ:

ताहिर रज़ा रामपुरी

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