दिल्ली राजस्थान तुम्हारा, या ख़्वाजा
सारा हिन्दुस्तान तुम्हारा, या ख़्वाजा
हिन्द में नव्वे लाख को कलमा पढ़वाया
हम पर है एहसान तुम्हारा, या ख़्वाजा
सारा अना सागर कूज़े में भर आया
सुनते ही फ़रमान तुम्हारा, या ख़्वाजा
तुम पे है फ़ैज़ान जनाब-ए-'उस्माँ का
हम पे है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा
तुम पे है फ़ैज़ान मदीने वाले का
हम पे है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा
फ़ैज़-ए-मदीना मिलता है अजमेर से ही
रौज़ा है ज़ीशान तुम्हारा, या ख़्वाजा
रहे सलामत सुन्नी-दावत-ए-इस्लामी
ये तो है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा
हरगिज़ न सम्मान वो पाएगा जग में
जो भी करे अपमान तुम्हारा, या ख़्वाजा
इन दोनों पर ख़ास करम तुम फ़रमाना
शाकिर और रिज़वान तुम्हारा, या ख़्वाजा
सय्यिद को तयबा की गलियाँ दिखला दो
है अदना दरबान तुम्हारा, या ख़्वाजा
दिल्ली राजस्थान तुम्हारा या ख़्वाजा | सारा हिन्दुस्तान तुम्हारा या ख़्वाजा

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