भाषा:
Get App

खोजें

Get Muslim Life Pro App

Get it on Google PlayDownload on the App Store

हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

  • यह साझा करें:
रज़ा रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा रज़ा !है मेरी शान रज़ा, है मेरी जान रज़ा !है मेरी आन, मेरी पहचानबजेगा हश्र तक डंका इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ का

रज़ा रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा रज़ा !
रज़ा रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा रज़ा !

है मेरी शान रज़ा, है मेरी जान रज़ा !
है मेरी आन, मेरी पहचान

बजेगा हश्र तक डंका इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ का
जहाँ में बोल है बाला इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ का

वो अपने वक़्त के बेशक इमाम-ए-बू-हनीफ़ा थे
कोई सानी नहीं मिलता इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ का

कोई है हुज्जतुल-इस्लाम, कोई है मुफ़्ती-ए-आ'ज़म
कोई ताजुश्शरी'आ है, कोई मुफ़स्सिर-ए-आ'ज़म
ये ऊँचा ख़ानदाँ किस का ? इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ का

कोई सदरु-श्शरी'आ है, कोई सदरुल-अफ़ाज़िल है
ये फ़ैज़ान-ए-नज़र किस का ? इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ का

जो क़ुदसी हश्र में पूछेंगे मुझ से, किस का पैरो था ?
कहूँगा कर के सर ऊँचा, इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ का

साहिब-ए-शान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

ख़ूब दर्स-ए-हदीस देते हैं
क़ौल-ए-असहाब भी सुनाते हैं
अहल-ए-क़ुरआन हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

सारे दरबान-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म हैं
ख़ादिमान-ए-रसूल-ए-अकरम हैं
या'नी सुल्तान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

रज़ा मेरा पीर है, रज़ा मेरा पीर है
रज़ा मेरा पीर है, रज़ा मेरा पीर है

कुफ़्र-ओ-शर की जमा'अतों के लिए
प्यारे आक़ा के दुश्मनों के लिए
एक तूफ़ान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

साहिब-ए-शान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

नाम-ए-असहाब-ओ-नाम-ए-आक़ा पर
नाम-ए-ख़्वाजा पे, नाम-ए-दाता पर
दिल से क़ुर्बान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

कोई अख़्तर है, कोई ख़ादिम है
कोई 'अत्तार, कोई क़ासिम है
या'नी ज़ीशान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

रज़ा मेरा पीर है, रज़ा मेरा पीर है
रज़ा मेरा पीर है, रज़ा मेरा पीर है

बे-वफ़ाई कभी नहीं करते
ज़ुल्म का साथ भी नहीं देते
ऐसे इंसान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

साहिब-ए-शान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

कह दो, राग़िब ! ज़माने वालों से
अहल-ए-हक़ को सताने वालों से
अहल-ए-ईमान हैं रज़ा वाले
हक़ की पहचान हैं रज़ा वाले

रज़ा मेरा पीर है, रज़ा मेरा पीर है
रज़ा मेरा पीर है, रज़ा मेरा पीर है


शायर:

मिस्बाह-उल-हक़ राग़िब

ना'त-ख़्वाँ:

हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
हाफ़िज़ अहसन क़ादरी

Muslim Life Pro App
Download
WhatsApp Group
Join Now