हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
वरना नाचारों का क्या हाल होता
असीरों कनीज़ों में क्या कुछ गुज़रती
मुसीबत के मारों का क्या हाल होता
निसार तेरी चहल पहल पर
हज़ारों ईदें रबीउल अव्वल
सिवाए इब्लीस के जहां में
सभी तो खुशियां मना रहे हैं
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
अये कौन आया चे दुनिया दे अंदर
होया गली गली रोशनियां
इब्राहीमी गुलशन अंदर, आज अजब बहारां आइयां
जिसनु हासिल करने दी खातिर, पाइयाँ मक्के दे अंदर दुहाइयाँ
आज़म लाल हलीमा ले गई, हाथ मल दियां रह गइयाँ दाइयाँ
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
मुहम्मद मुस्तफा आये बहारां मुस्कुरा पइयाँ
खिलाने फूल ते कलियाँ, हज़ारां मुस्कुरा पइयाँ
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
वो जो न थे तो कुछ न था, वो जो न हों तो कुछ न हों
जान है वो जहान की , जान है तो जहान है
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
नारियों का दौर था, दिल जल रहा था नूर का
तुम को देखा हो गया ठंडा कलेजा नूर का
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
सुब्ह तयबाह में हुई बंटता है बाड़ा नूर का
सदक़ा लेने नूर का आया है तारा नूर का
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
नूर की खैरात दे दे दौड़ ते हैं महरो माह
उठती है किस शान से गर्दे सवारी वाह वाह
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
ज़मीनों ज़मां तुम्हारे लिए, मकीनों मकां तुम्हारे लिए
चुनिनों चुनां तुम्हारे लिए, बने दो जहां तुम्हारे लिए
दहन में जुबां तुम्हारे लिए, बदन में है जान तुम्हारे लिए
हम आये यहां तुम्हारे लिए, उठें भी वहाँ तुम्हारे लिए
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
सबा वो चले के बाग़ फले, वो फूल खिले के दिन हो भले
लिवा के टेल खना में खुले, रज़ा की ज़ुबाँ तुम्हारे लिए
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
तेरी आमद थी के बैतुल्लाह मुजरे को जुका
तेरी हैबत थी के हर बूत थरथरा कर गिर गया
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
वरना नाचारों का क्या हाल होता
असीरों कनीज़ों में क्या कुछ गुज़रती
मुसीबत के मारों का क्या हाल होता
आप आये हैं तो ये आयी बहारें
हर सिम्त सल्ले अला की पुकारें
महीनों में रबीउल अव्वल न होता
तो फिर इन बहारों का क्या हाल होता
हुज़ूर आप आये तो दिल जगमगाए
वरना नाचारों का क्या हाल होता
असीरों कनीज़ों में क्या कुछ गुज़रती
मुसीबत के मारों का क्या हाल होता
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