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हुज़ूर आपके दर का में अदना गदा हूँ

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हुज़ूर ! आपके दर का में अदना गदा हूँमेरे दम में आक़ा ! ये दम आपका हैहुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँमें कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है
हुज़ूर ! आपके दर का में अदना गदा हूँ
मेरे दम में आक़ा ! ये दम आपका है
हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है

ये क़ुरआन रब ने जो नाज़िल किया है
हुज़ूर आपका ही क़सीदा लिखा है
खुदा कह रहा है हबीब-ए-खुदा से
ये लोह भी तुम्हारी , क़लम आपका है

हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है

उसे गर्दिशें अब मिटाएंगी कैसे
हवाएं उसे अब बुजाएँगी कैसे
दिया बन के जलता है सीने में हर दम
मेरे मुस्तफा ! ये जो गम आपका है

हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है

फलक क्यों है रोशन ज़रा ये तो सोचो
ज़मीं क्यों है रोशन ज़रा ये तो समजो
वहां पर भी आक़ा ! क़दम आपके है
यहाँ पर भी आक़ा ! क़दम आपका है

हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है

जुबां पे ये जिसके ये हर दम सदा हो
मदद ! अल-मदद ! अये रसूले खुदा हो
वही जा रहा है खुल्द-ए-बरी को
के थामा हुआ जिसने अलम आपका है

हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है

में सबसे बुरा हूँ में ये मानता हूँ
हुज़ूर आपका हूँ यही जानता हूँ
बड़ा नाज़ है मुझको मेरे मुस्तफा पर
अता जो किया है भरम आपका है

हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है

जहाँ पर फ़रिश्ते सलामी को आएं
जहाँ पर हैं इंसान मे'राज पाएं
छमा-छम जहाँ बरसे नूर खुदा का
मेरे मुस्तफा ! वो हरम आपका है

हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है

यही कब से अहमद ! मेरी जुस्तजू है
यही तो सदा से मेरी आरज़ू है
मेरी रूह निकले उसी रास्ते पर
जहाँ पर भी नक़्श-ए-क़दम आपका है

हुज़ूर ! आपके टुकड़ों पर जी रहा हूँ
में कुछ भी नहीं हूँ करम आपका है
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