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इलाही कोई ऐसा इंतेज़ाम हो जाये

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इलाही कोई ऐसा इंतिज़ाम हो जाएदरे रसूल पे मेरा सलाम हो जाए

इलाही कोई ऐसा इंतिज़ाम हो जाए
दरे रसूल पे मेरा सलाम हो जाए

इलाही इस से बढ़ कर आरज़ू-इ-दिल नहीं कोई
इलाही इस से बढ़ कर मकसदे साईल नहीं कोई
इलाही इस से बढ़ कर इश्क़ का हासिल नहीं कोई
मुहम्मद सामने हो और ये मेरा दम निकल जाए

इलाही कोई ऐसा इंतिज़ाम हो जाए
दरे रसूल पे मेरा सलाम हो जाए

जब नूरे मुजस्सम से है दोनों जहां रोशन
फिर मेरे मुक़द्दर को जगा क्यों नहीं देते
उड़ कर में पहुँच जाऊं मदीने की फ़ज़ा में
मेरे पर जिब्राईल लगा क्यों नहीं देते

इलाही कोई ऐसा इंतिज़ाम हो जाए
दरे रसूल पे मेरा सलाम हो जाए

अरमान मेरे दिल से मिटा क्यों नहीं देते
सरकार मदीने में बुला क्यों नहीं देते
दीदार भी होता रहे हर वक़्त मुयस्सर
क़दमों में शहा अपने सुला क्यों नहीं देते

इलाही कोई ऐसा इंतिज़ाम हो जाए
दरे रसूल पे मेरा सलाम हो जाए

इलाही आरज़ू-इ-दीदारे पुरनम निकल जाए
निकल जाए मजाले कोशिशे बेख़म निकल जाए
खलील वारसी के दिल से पेचो गम निकल जाए
मुहम्मद कहते कहते मेरा ये दम निकल जाए

इलाही कोई ऐसा इंतिज़ाम हो जाए
दरे रसूल पे मेरा सलाम हो जाए
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