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जहां भी जाऊं नजर में रहता है आपका दरबार

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जहां भी जाऊं नजर में रहता है आपका दरबार

जहां भी जाऊं नज़र में रहता है आपका दरबार
मेरे सरकार 

जहां भी जाऊं नज़र में रहता है आपका दरबार
यही तमन्ना है रोज़-ए-महशर हो आपका दीदार
बुलावा भेजें तो आये तैबा, ये आपका हुब्दार 

जहां भी जाऊं नज़र में रहता है आपका दरबार
यही तमन्ना है रोज़-ए-महशर हो आपका दीदार

मेरे जो अंदर की ये तड़प है , यही है मेरी हयात 
इसी तड़पने तो ज़िन्दगी की बना रक्खी है ये बात
यक़ीन-ए-क़ामिल है दो जहां में है आपकी सरकार 

इसी वसीले से दो जहां के चराग़ जलते हैं
सभी जहानों के कारखाने इसी से चलते हैं
निगाह मुझको भी एक करम की है आपकी दरकार 

जहां भी जाऊं नज़र में रहता है आपका दरबार
यही तमन्ना है रोज़-ए-महशर हो आपका दीदार
बुलावा भेजें तो आये तैबा, ये आपका हुब्दार

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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