खुदा के फ़ज़ल से हम पर है साया गौसे आज़म का
हमें दोनों जहां में है, सहारा गौसे आज़म का
हमारी लाज किसके हाथ है, बग़दाद वाले के
मुसीबत टाल देना काम किसका गौसे आज़म का
मुहम्मद का रसूलों में है जैसा मर्तबा आला
है अफ़ज़ल औलिया में यूँही रुतबा गौसे आज़म का
जनाबे गॉस दूल्हा और बाराती औलिया होंगे
मज़ा दिखलाएगा महशर में सेहरा गौसे आज़म का
निदा देगा मुनादी हश्र में यूँ क़ादरियों को
किधर हैं क़ादरी कर लें नज़ारा गौसे आज़म का
मुखालिफ क्या करे मेरा के है बे-हद करम मुज पर
खुदा का, रहमतुल्लिल आलमीं का, गौसे आज़म का
बुला कर काफिरों को देते हैं अब्दाल का रुतबा
हमेशा जोश पर रहता है दरिया गौसे आज़म का
लोहाब अपना चटाया अहमदे मुख़्तार ने उनको
फिर कैसे न होता बोल बाला गौसे आज़म का
पड़ी ला-हॉल और शैतान के धोके को किया गारत
उलूमो फ़ज़ल से वो नूर चमका गौसे आज़म का
रहे पाबंद अहकामे शरीयत इब्तिदा से ही
न छूटा शीरखारी में भी रोज़ा गौसे आज़म का
जमीले क़ादरी सो जान से क़ुर्बान मुर्शिद पर
बनाया जिसने मुज जैसे को बाँदा गौसे आज़म का
मुश्किल पड़े तो याद करो दस्तगीर को
बग़दाद वाले हज़रते पीराने पीर को
या गॉस अल-मदद, या गॉस अल-मदद
या जिलाली शय-अल्लिल्लाह या जिलाली शय-अल्लिल्लाह
खुदा के फ़ज़ल से हम पर है साया गौसे आज़म का
हमें दोनों जहां में है, सहारा गौसे आज़म का
या शाहे जिलान करम है तेरा
मेरे ग्यारवी वाले पीर, गौसे आज़म दस्तगीर
तेरे दर का में फ़कीर, गौसे आज़म दस्तगीर
तेरा रुतबा बे-नज़ीर, गौसे आज़म दस्तगीर
मेरी चमका दी तक़दीर, गौसे आज़म दस्तगीर
हमारी लाज किसके हाथ है, बग़दाद वाले के
मुसीबत टाल देना काम किसका गौसे आज़म का
खुदा के फ़ज़ल से हम पर है साया गौसे आज़म का
हमें दोनों जहां में है, सहारा गौसे आज़म का
मुहम्मद का रसूलों में है जैसा मर्तबा आला
है अफ़ज़ल औलिया में यूँही रुतबा गौसे आज़म का
खुदा के फ़ज़ल से हम पर है साया गौसे आज़म का
हमें दोनों जहां में है, सहारा गौसे आज़म का
जनाबे गॉस दूल्हा और बाराती औलिया होंगे
मज़ा दिखलाएगा महशर में सेहरा गौसे आज़म का
निदा देगा मुनादी हश्र में यूँ क़ादरियों को
किधर हैं क़ादरी कर लें नज़ारा गौसे आज़म का
मुखालिफ क्या करे मेरा के है बे-हद करम मुज पर
खुदा का, रहमतुल्लिल आलमीं का, गौसे आज़म का
मेरे ग्यारवी वाले पीर, गौसे आज़म दस्तगीर
तेरे दर का में फ़कीर, गौसे आज़म दस्तगीर
तेरा रुतबा बे-नज़ीर, गौसे आज़म दस्तगीर
मेरी चमका दी तक़दीर, गौसे आज़म दस्तगीर
जमीले क़ादरी सो जान से क़ुर्बान मुर्शिद पर
बनाया जिसने मुज जैसे को बाँदा गौसे आज़म का
खुदा के फ़ज़ल से हम पर है साया गौसे आज़म का
हमें दोनों जहां में है, सहारा गौसे आज़म का







