सरकार-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म ! नज़र-ए-करम ख़ुदा-रामेरा ख़ाली कासा भर दो, मैं फ़क़ीर हूँ तुम्हारा
रौनक़-ए-कुल-औलिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !पेशवा-ए-अस्फ़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !
या गौस पिया रंग दो मेरी ऐसी चुनरियाया गौस पिया रंग दो मेरी ऐसी चुनरियाइतराए फिरूं सारी में बग़दाद नगरीया
सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानीवो महबूब-ए-सुब्हानी , शहबाज़-ए-ला-मकानीवो किन्दील-ए-नूरानी
रुतबा ये विलायत में , क्या गौस ने पाया हैअल्लाह ने वलियों का , सुलतान बनाया हैहै दस्त-ए-'अली सर पर , हसनैन का साया है
रुख से पर्दा अब अपने उठा दोजालियों पर निगाहें जमी हैंअपना जलवा इसी में दिखा दो
खुदा के फ़ज़ल से हम पर है साया गौसे आज़म काहमें दोनों जहां में है, सहारा गौसे आज़म का















