क्या शान है तेरी सल्ले अला या अब्दुल क़ादिर जिलानी
तू नूरे नबी तू नूरे खुदा या अब्दुल क़ादिर जिलानी
हर जा तेरा सिक्का चलता है, कुनैन में सदक़ा बंटता है
शयल-लिल्लाह कुछ कीजिये अता या अब्दुल क़ादिर जिलानी
जब आपका में कहलाता हूँ, तेरे दर के टुकड़े खाता हूँ
क्यों हो मुझको खौफ ककयामत का, या अब्दुल क़ादिर जिलानी
है विर्द यही अब सुब्हो मसा, या अब्दुल क़ादिर जिलानी
में आपके दर का हूँ कुत्ता , या अब्दुल क़ादिर जिलानी
क्या शान है तेरी सल्ले अला या अब्दुल क़ादिर जिलानी
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