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मौला सलामत रखे, मेरे हज़ूर ताजुश्शरिया को

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मौला सलामत रखे, मेरे हज़ूर ताजुश्शरिया कोमौला सलामत रखे, मेरे हज़ूर ताजुश्शरिया कोमौला सलामत रखे, जा-नशीन-ए-मुफ़्ती-ए-आ'ज़म को

मौला सलामत रखे, मेरे हज़ूर ताजुश्शरिया को

मौला सलामत रखे, मेरे हज़ूर ताजुश्शरिया को
मौला सलामत रखे, जा-नशीन-ए-मुफ़्ती-ए-आ'ज़म को

चेहरा तो ज़रा देखो, क्या शान-ए-जलालत है
है नूर-ए-ख़ुदा इनमें, ये बात हक़ीक़त है

चेहरा लगे सुहाना, मेरे अज़हरी मियां का
हर सुन्नी है दीवाना, मेरे अज़हरी मियां का

मुरशिद को ज़रा देखो, नज़दीक से तुम जा कर
हर एक 'अदा उनकी पाबंद-ए-शरीयत है

तक़वा में मिसाली है, फ़तवा में मिसाली है
ढूंढें तो कहाँ ढूंढें, अब कोई दूजा अख़्तर

इस दौर-ए-ज़माना में इनका ना कोई सानी
ये बद्र-ए-तरीक़त हैं, ये ताज-ए-शरीयत हैं

बग़दाद से मदीना, अजमेर से बरेली
रूहानी आना जाना, मेरे अज़हरी मियां का

इस दौर-ए-ज़माना में इनका ना कोई सानी
ये बद्र-ए-तरीक़त हैं, ये ताज-ए-शरीयत हैं

इस दौर-ए-ज़माना में देखे तो बहुत से हैं
पर ताज-ए-शरीयत का, जचता है तेरे ऊपर

इस दौर-ए-ज़माना में इनका ना कोई सानी
ये बद्र-ए-तरीक़त हैं, ये ताज-ए-शरीयत हैं

निस्बत है किसी को भी, इस अज़हरी दामन से
है दूर वहाबी के, ईमान सलामत है

वाबस्ता हुआ जो भी, इस अज़हरी दामन से
है दूर वहाबी के, ईमान सलामत है

चेहरा लगे सुहाना, मेरे अज़हरी मियां का
हर सुन्नी है दीवाना, मेरे अज़हरी मियां का

नादान अभी तूने, जाना ही नहीं उनको
इस वक्त मेरे मुरशिद, दुनिया की ज़रूरत है

बग़दाद से मदीना, अजमेर से बरेली
रूहानी आना जाना, मेरे अज़हरी मियां का

नादान अभी तूने, जाना ही नहीं उनको
इस वक्त मेरे मुरशिद, दुनिया की ज़रूरत है

महफ़ूज़ रहेंगे वो आबाद रहेंगे वो
जिन जिन के तसव्वुर में आबाद वो सूरत है

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