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मीरा वलियों के इमाम | दो पंजतन के नाम

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मीरा वलियों के इमाम | दो पंजतन के नाम

मीरा वलियों के इमाम,

दे दो पंजतन के नाम,

हमने झोली है फैलाई बड़ी देर से,

 

डालो नज़र-ए-करम सरकार,

अपने मंगतो पर एक बार,

हमने आस है लगायी बड़ी डर से।


दिल की कली मेरी आज खिली है,

आप आए हैं खबर मिली,

जरा धीरे धीरे आओ,

लिल्लाह करम फरमाओ,

हमने महफिल है सजयी बड़ी डर से।


तुम जो बनाओ बात बनेगी,

दोनो जहां में लाज रहेगी,

लजपाल करम अब कर दो,

मंगतों की झोली भर दो,

भर दो कासा सबका पंजतनी खैर से।


क़ल्बो-नज़र में नूर समाया,

एक सुरूर ज़हन पे छाया,

जब मीरा लगे पिलाने,

मेरे होश लगे ठिकाने,

ऐसी पी है मैं मय दस्तगीर से।

 

मुश्किल जब भी सर पर आई,

तेरी रहमत आड़े आई,

जब मैंने तुम्हें पुकारा,

काम आया तेरा सहारा,

चलता आसी का गुज़ारा तेरी खैर से।

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Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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