रहमत का वसीला है, बरकत का वसीला है
मौला का दस्तरख्वान है क्या, ने'मत का वसीला है
मेरे घर में सजा है आज मौला का दस्तरख्वान
दुनिया में नहीं इस दस्तरख्वान के जैसा दस्तरख्वान
मेरे घर में सजा है आज मौला का दस्तरख्वान
करम करम अल्लाह-ओ-नबी का, करम करम बीबी ज़हरा का
करम करम अल्लाह-ओ-नबी का, करम करम बीबी ज़हरा का
मशहूर ज़माने वालों में था दस्तरख्वान हसन का
इस घर का दस्तरख्वान भी है उस दस्तरख्वान का सदक़ा
हाँ रिज़्क़ की तंगी दूर करे है ऐसा दस्तरख्वान
मौला का दस्तरख्वान
मेरे घर में सजा है आज मौला का दस्तरख्वान
हो जिसके घर में रिज़्क़ की तंगी, दस्तरख्वान सजा ले
गर कुछ भी नहीं हो पास तो बस पानी पे नज़र दिला ले
फिर देख वसी'अ करता है मौला कैसा दस्तरख्वान
मौला का दस्तरख्वान
मेरे घर में सजा है आज मौला का दस्तरख्वान
करम करम अल्लाह-ओ-नबी का, करम करम बीबी ज़हरा का
करम करम अल्लाह-ओ-नबी का, करम करम बीबी ज़हरा का
मंसूब किसी मासूम से कर दो घर का दाना दाना
एक बार दुरूद-ए-पाक पढ़ो साईल को खिला दो खाना
तारीख में ऐसा देखा है ज़हरा का दस्तरख्वान
मौला का दस्तरख्वान
मेरे घर में सजा है आज मौला का दस्तरख्वान
शब्बीर के रोज़े पर जाते हैं जितने चाहने वाले
सब खाते हैं तक़दीर से कैसे कैसे पाक निवाले
मौला के दर पे मिलता है मौला का दस्तरख्वान
मौला का दस्तरख्वान
मेरे घर में सजा है आज मौला का दस्तरख्वान
करम करम अल्लाह-ओ-नबी का, करम करम बीबी ज़हरा का
करम करम अल्लाह-ओ-नबी का, करम करम बीबी ज़हरा का
फरहान पढ़े, मज़हर भी लिखे, इस दस्तरख्वान की मिदहत
इस दस्तरख्वान पे खाना खा कर बढ़ जाती है इज़्ज़त
है आल-ए-नबी से निस्बत जिसको ऐसा दस्तरख्वान
मौला का दस्तरख्वान
मेरे घर में सजा है आज मौला का दस्तरख्वान







