मुहम्मद का रोज़ा क़रीब आ रहा है
बुलंदी पे अपना नसीब आ रहा है
फरिश्तों ! ये दे-दो ये पैग़ाम उनको
ख़बर जा के दे-दो उनको फरिश्तों !
के ख़ादिम तुम्हारा स'ईद आ रहा है
मदीना मदीना मदीना मदीना
बड़ा लुत्फ़ देता है नाम-ए-मदीना
वफ़ा तुम न देखोगे हर-गीज़ किसी में
ज़माना वो ऐसा क़रीब आ रहा है
हिफाज़त करो अपने ईमान-ओ-दीं की
ज़माना वो ऐसा अजीब आ रहा है
मुहम्मद का रोज़ा क़रीब आ रहा है
बुलंदी पे अपना नसीब आ रहा है
मदीना मदीना मदीना मदीना
बड़ा लुत्फ़ देता है नाम-ए-मदीना
तुम्हें कुछ ख़बर है कहाँ जा रहा हूँ
रसूल-ए-ख़ुदा हैं वहाँ जा रहा हूँ
तुम्हें कुछ ख़बर है मैं क्या पा रहा हूँ
मोहब्बत का उनकी मज़ा पा रहा हूँ
चलो जा के रहना मदीने में अब तो
क़यामत का मंज़र क़रीब आ रहा है
फरिश्तों ! ये दे-दो ये पैग़ाम उनको
ख़बर जा के दे-दो उनको फरिश्तों !
के ख़ादिम तुम्हारा स'ईद आ रहा है
मदीना मदीना मदीना मदीना
बड़ा लुत्फ़ देता है नाम-ए-मदीना







