नाते मुस्तफा सुन कर रूह जब मचलती है
आशिकों के चेहरे से चाँदनी निकलती है
उनके सदक़े खाते हैं, उनके सदक़े पीते हैं
मुस्तफा की चौखट से क़ायनात पलती है
थाम कर शहे दीं की रहमतों की ऊँगली को
जन्नते महोब्बत में ज़िन्दगी टहलती है
काश वो नज़र आते ख्वाब के दरीचे से
मेरी दीदा-इ-हसरत पहेरो आँख मलती है
लफ़्ज़े कुन्न के जलवे में मुस्तफा का जलवा है
नूरे मुस्तफ़ाई में क़ायनात ढलती है
उनके सदक़े खाते हैं, उनके सदक़े पीते हैं
मुस्तफा की चौखट से क़ायनात पलती है
थाम कर शहे दीं की रहमतों की ऊँगली को
जन्नते महोब्बत में ज़िन्दगी टहलती है
काश वो नज़र आते ख्वाब के दरीचे से
मेरी दीदा-इ-हसरत पहेरो आँख मलती है
लफ़्ज़े कुन्न के जलवे में मुस्तफा का जलवा है
नूरे मुस्तफ़ाई में क़ायनात ढलती है
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