पैकर-ए-दिल-रुबा बन के आया, रूह-ए-अर्ज़-ओ-समा बन के आया
सब रसूल-ए-ख़ुदा बन के आए, वो हबीब-ए-ख़ुदा बन के आया
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
जो हिज्र-ए-तयबा में याद बन कर ख़याल आया, कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
तेरी दुआओं ही की बदौलत अज़ाब-ए-रब से बचे हुए हैं
जो हक़ में उम्मत के तेरे लब पर सवाल आया, कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
ग़ुरूर उमय्या का तोड़ डाला, दिखा के ईमान वाला जज़्बा
जो हब्शियों में ग़ुलाम तेरा बिलाल आया, कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
नबी की आमद से नूर फैला, फ़ज़ा-ए-शब पर निखार आया
चमन में कलियों के रुख़ पे हुस्न-ओ-जमाल आया, कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
लक़ब जो सिद्दीक़ तेरा ठहरा, निराला सब से है तेरा पहरा
नबी के शातिम पे जैसे तुझ को जलाल आया, कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
उमर की जुर्अत पे जाऊँ क़ुरबाँ, थे क़ैसर-ओ-किस्रा जिन से लर्ज़ां
उमर के आने से कुफ्र पर जो ज़वाल आया, कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
हुसैन इब्न-ए-अली का ना'रा ज़बाँ पर आया तो दिल पुकारा
नबी का प्यारा, हसीं दुलारा, कमाल आया ! कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !
नबी तो, साइम ! सभी हैं आ'ला, हैं रुत्बे सब के अज़ीम-ओ-बाला
मगर जो आख़िर में आमिना का वो लाल आया, कमाल आया !
नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया !

नबी का लब पर जो ज़िक्र है बे-मिसाल आया, कमाल आया
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