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रश्के कमर हूँ रंगे रूखे आफताब हूँ | ज़र्रा तेरा जो अये शहे गर्दो जनाब हूँ

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रश्के कमर हूँ रंगे रूखे आफताब हूँ | ज़र्रा तेरा जो अये शहे गर्दो जनाब हूँ

रश्के कमर हूँ रंगे रूखे आफताब हूँ
ज़र्रा तेरा जो अये शहे गर्दो जनाब हूँ
 
दर्रे नजफ़ हूँ गोहरे पाके खुशाब हूँ
यानी तुराबे रह-गुज़रे बु-तुराब हूँ 
 
क्यों नाला सोज़ से करूँ, क्यों खूने दिल पियूं
शिखे कबाब हूँ न में जामे शराब हूँ
 
में तो कहा ही चाहूँ के बंदा हूँ शह का
पर लुत्फ़ जब है कह दें अगर वो जनाब हूँ
 
मिट जाए ये खुदी तो वो जलवा कहाँ नहीं
दर्दा में आप अपनी नज़र का हिजाब हूँ
 
दावा है सब से तेरी शफ़ाअत बेश्तर
दफ्तर में आसियों के शहा इंतेखाब हूँ
 
कालिब ताहि किये हमा-आगोश है हिलाल
अये शह-सवारे तयबाह में तेरी रिकाब हूँ
 
हसरत में ख़ाक बोसी-इ-तयबाह की अये रज़ा
टपका जो चश्मे महर से वो खूने नाब हूँ
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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