हसरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी
सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी
वो महबूब-ए-सुब्हानी , शहबाज़-ए-ला-मकानी
वो किन्दील-ए-नूरानी
सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी
तेरे जद्द की है बारवी ग़ौस-ए-आ'ज़म
मिली है तुजे ग्यारवी ग़ौस-ए-आ'ज़म
कोई उनके रुतबे को क्या जानता है
मुहम्मद के हैं जां-नशीं ग़ौस-ए-आ'ज़म
सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी
हमारी भी लिल्लाह बिगड़ी बनादो
गुलामों के तुम हो मुईन ग़ौस-ए-आ'ज़म
हैं गेरे हुए चार जानिब से दुश्मन
ख़ुदारा ! बचा मेरा दीं ग़ौस-ए-आ'ज़म
सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी
छुपा ले मुझे अपने दामन के निचे
के ग़म की घटाएं उठें ग़ौस-ए-आ'ज़म
वो है कौन सा उनके दर का भिकारी
मददगार जिनके नहीं ग़ौस-ए-आ'ज़म
सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी
इलाही ! तेरा कलमा-ए-पाक मुझको
सिखाए दम-ए-वापसी ग़ौस-ए-आ'ज़म
ब-सूए जमील आज निगाह-ए-इनायत
कभी ग़ौस-ए-आ'ज़म कभी ग़ौस-ए-आ'ज़म
सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी







