सर-ए-महफ़िल करम इतना मेरी सरकार हो जाए
सर-ए-महफ़िल करम इतना मेरी सरकार हो जाए
निगाहें मुन्तज़िर रह जाएं और दीदार हो जाए
तसव्वुर में तेरी हर शय पे यूँ नज़रें जमाता हूँ
ना जाने कौन सी शय में तेरा दीदार हो जाए
ग़ुलामे मुस्तफ़ा बन कर मैं बिक जाऊं मदीने में
नबी के नाम पर सौदा सारे बाज़ार हो जाए
संभल कर पाँव रखना हाजियों! शहर-ए-मदीना में
कहीं ऐसा ना हो सारा सफर बेकार हो जाए
मैं ग़म इतना तो हो जाऊं तेरी ज़ाते आली में
जो आँखें बंद हो जाएं तेरा दीदार हो जाए







