सरकार ए गौस ए आज़म नज़्र ए करम खुदारा,
मेरा ख़ाली कासा भर दो मैं फ़कीर हुं तुम्हारा।
झोली को मेरी भर दो वरना कहेगी दुनिया,
ऐसे सखी का मंगता फिरता है मारा मारा।
सब का कोई न कोई दुनिया में आसरा है,
मेरा बा–जुज़ तुम्हारे कोई नहीं सहारा।
मीरा बने हैं दूल्हा महफिल सजी हुई है,
सब औलिया बाराती क्या खूब है नज़ारा।
ये अता ए दस्तगीरी कोई मेरे दिल से पूछे,
वहीं आ गए मदद को मैंने जब जहां पुकारा।
ये तेरा करम है या गौस जो बना लिया है अपना,
कहां मुझसा ये कमिना कहां सिलसिला तुम्हारा।
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