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सुनते हैं के महशर में सिर्फ उनकी रसाई है

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सुनते हैं के महशर में सिर्फ उनकी रसाई है

सुनते हैं के महशर में सिर्फ उनकी रसाई है

सुनते हैं के महशर में सिर्फ उनकी रसाई है
गर उनकी रसाई है लो जब तो बन आई है

मचला है के रहमत ने उम्मीद बंधाई है
क्या बात तेरी मुजरिम क्या बात बनाई है

सब ने शब-ए-महशर में ललकार दिया हम को
ऐ बेकसों के आका अब तेरी दुहाई है

बाज़ार-ए-अमल में तो सौदा न बना अपना
सरकार करम तुझमें ऐबी की समाई है

ऐ दिल ये सुलगना क्या जलना है तो जल्दी उठ
दम घुटने लगा ज़ालिम क्या धुंवी रमाई है

मुजरिम को न शर्माओ अहबाब कफ़न ढक दो
मुँह देख के क्या होगा पर्दे में भलाई है

अब आप ही संभालें तो काम अपने संभल जाएं
हमने तो कमाई सब खेलों में गवाई है

ऐ इश्क तेरे सदके जलने से छूटे सस्ते
जो आग बुझा देगी वो आग लगाई है

तैबा न सही अफज़ल मक्का ही बड़ा सहीद
हम इश्क के बंदे हैं क्यों बात बढ़ाई है

मतलम ये शक क्या था वल्लाह रज़ा परवा
सिर्फ उनकी रसाई है सिर्फ उनकी रसाई है

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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