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ख़ुदा का दिल में बस जाना ये इक फ़ज़्ल-ए-ख़ुदावंदी

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ख़ुदा का दिल में बस जाना ये इक फ़ज़्ल-ए-ख़ुदावंदी

ख़ुदा का दिल में बस जाना ये इक फ़ज़्ल-ए-ख़ुदावंदी
ख़ुदा का फ़ज़्ल पाना भी ख़ुदा की मेहरबानी है

मुझे है 'इश्क़ अल्लाह से, मेरा महबूब अल्लाह है
मुझे ये 'इश्क़ होना भी ख़ुदा की मेहरबानी है

मेरे ईमान की लज़्ज़त ख़ुदा के नाम ही से है
ख़ुदा का नाम लेना भी ख़ुदा की मेहरबानी है

कलामुल्लाह को पढ़ता हूँ, ख़ुदा से बात करता हूँ
ख़ुदा से जी लगाना भी ख़ुदा की मेहरबानी है

ख़ुदा के ज़िक्र से दिल में लगे ज़ंग को मिटाता हूँ
कि दिल से ज़ंग मिटाना भी ख़ुदा की मेहरबानी है

ख़ुदा की याद में शाम-ओ-सहर मेरे गुज़रते हैं
कि इन यादों में बसना भी ख़ुदा की मेहरबानी है

मैं इक गुमनाम सा रुदरुद फ़क़त अश'आर लिखता हूँ
मेरा अश'आर लिखना भी ख़ुदा की मेहरबानी है

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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