भाषा:
Get App

खोजें

Get Muslim Life Pro App

Get it on Google PlayDownload on the App Store

मौसम सुहाना हुआ नबी का जब आना हुआ

  • यह साझा करें:
मौसम सुहाना हुआ, नबी का जब आना हुआमेरे आक़ा के जल्वों से रौशन ज़माना हुआक़ुर्बान जाऊँ मैं ये बोले जिब्रील-ए-अमीं
 
मौसम सुहाना हुआ, नबी का जब आना हुआ
मेरे आक़ा के जल्वों से रौशन ज़माना हुआ

क़ुर्बान जाऊँ मैं ये बोले जिब्रील-ए-अमीं
कि सिदरा से भी आगे नबी का जब जाना हुआ

उवैस-ए-करनी ने ख़ुद को मिटा डाला
बिन देखे आक़ा का जब दिल दीवाना हुआ

ज़ाहिर में इल्लल्लाह, बातिन में न'ऊज़ु-बिल्लाह
नज़्दी वहाबी का नाटक पुराना हुआ

दीन-ए-मुहम्मद की ख़ातिर 'अली तेरा
क़ुर्बान कर्बल में सारा घराना हुआ

दिन हो गया रौशन, तारीकियाँ मिट गईं
मेरे नबी का जब कहीं भी मुस्कुराना हुआ

ग़ुस्ताख़ियाँ कर के सच है, सलीम-ए-रज़ा !
नज़्दी वहाबी का दोज़ख़ ठिकाना हुआ


शायर:
सलीम रज़ा पीलीभीती

ना'त-ख़्वाँ:
सलीम रज़ा पीलीभीती
Muslim Life Pro App
Download
WhatsApp Group
Join Now