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नूर वाला आया है

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नूर वाला आया है

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

जब तलक ये चाँद-तारे झिलमिलाते जाएँगे
तब तलक जश्न-ए-विलादत हम मनाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

ना'त-ए-महबूब-ए-ख़ुदा सुनते सुनाते जाएँगे
या रसूलल्लाह का ना'रा लगाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

जश्न-ए-मीलाद-ए-मुबारक कैसे छोड़ें हम भला
जिन का खाते हैं उन्हीं के गीत गाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

चार जानिब हम दिये घी के जलाते जाएँगे
घर तो घर सारे मुहल्ले को सजाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

'ईदे-ए-मीलादुन्नबी की शब चराग़ाँ कर के हम
क़ब्र नूर-ए-मुस्तफ़ा से जगमगाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

तुम करो जश्न-ए-विलादत की ख़ुशी में रौशनी
वो तुम्हारी गोर-ए-तीरा जगमगाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

हश्र में ज़ेर-ए-लिवा-ए-हम्द, ऐ 'अत्तार ! हम
ना'त-ए-सुल्तान-ए-मदीना गुनगुनाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

बहर-ए-बख़्शिश पास अपने कुछ नहीं इस के सिवा
'उम्र-भर ना'तें सुनेंगे और सुनाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

ना'त-ख़्वानी मौत भी हम से छुड़ा सकती नहीं
क़ब्र में भी मुस्तफ़ा के गीत गाते जाएँगे

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !

या रसूलल्लाह के ना'रे से हम को प्यार है
हम ने ये ना'रा लगाया अपना बेड़ा पार है

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है
सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है

अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह !
अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह !


शायर:

मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी

ना'त-ख़्वाँ:

ओवैस रज़ा क़ादरी
हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
फ़रहान अली क़ादरी

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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