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नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया

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नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया

मरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफा
मरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफा

नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा

सुब्ह तयबाह में हुई बंटता है बाड़ा नूर का
सदक़ा लेने नूर का आया है तारा नूर का

नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा

बारविह के चाँद का मुजरा है सजदा नूर का
बारह बुर्ज़ों से जुका एक एक सितारा नूर का

नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा

ताजवाले देख कर तेरा इमामा नूर का
सर जुकाते हैं इलाही बोल बाला नूर का

नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा

अये रज़ा ये अहमदे नूरी का फैज़े नूर है
हो गयी मेरी ग़ज़ल पड़ कर कसीदा नूर का

नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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