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क़ाफ़िले ने सूए त़यबा कमर आराई की

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क़ाफ़िले ने सूए त़यबा कमर आराई की,मुश्किल आसान इलाही मेरी तन्हाई की।

क़ाफ़िले ने सूए त़यबा कमर आराई की,

मुश्किल आसान इलाही मेरी तन्हाई की।

 

लाज रख ली त़मए अ़फ़्व के सौदाई की,

ऐ मैं कुरबां मेरे आक़ा बड़ी आक़ाई की।

 

फ़र्श ता अ़र्श सब आईना ज़माइर ह़ाज़िर,

बस क़सम खाई ये उम्मी तेरी दानाई की।

 

 

शश जिहत सम्ते मुक़ाबिल शबो रोज़ एक ही ह़ाल,

धूम वन्नज्म में है आप की बीनाई की।

 

 

पानसो साल की राह ऐसी है जैसे दो गाम,

आस हमको भी लगी है तेरी शिनवाई की।

 

चांद इशारे का हिला हुक्म का बांधा सूरज,

वाह क्या बात शहा तेरी तुवानाई की।

तंग ठहरी है रज़ा जिस के लिए वुस्अ़ते अ़र्श,

बस जगह दिल में है उस जल्वए हरजाई की।

 

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