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सरवर कहूं के मालिकों मौला कहूं तुझे

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सरवर कहूं के मालिकों मौला कहूं तुझे


सरवर कहूं के मालिकों मौला कहूं तुझे,
        
बागे ख़लील का गुल ए ज़ैबा कहूं तुझे


हिरमा नसीब हूं तुझे उम्मीद गह कहूं,

जाने मुरादों काने तजल्ला कहूं तुझे


गुलज़ार ए कुद्स का रंगीन अदा कहूं,

दरमाने दर्द ए बुलबुल ए शैदा कहूं तुझे


सुब्हे वतन पे शाम ए गरीबां को दूं शरफ,

बेकस नवाज़ ए गेसुओं वाला कहूं तुझे


अल्लाह रे तेरे जिस्म ए मुनव्वर की ताबिशें,

ऐ जाने जां मैं जानें तजल्ला कहूं तुझे
 

मुजरिम हूं अपने अफ़व का सामा करूं शहा,

यानी शफी ए रोज़ ए जजा का कहूं तुझे


बे दाग लालह या क – मरे बे कलफ कहूं,
      
बे खार गुलबुने चमन आरा कहूं तुझे
 

इस मुर्दा दिल को मुज्दा हयात ए अबद का दूं,

ताबो तवाने जाने मसीहा कहूं तुझे
 

तेरे तो वस्फ ऐब ए तनाही से है बरी,
                     
हैरान हूं मेरे शाह मैं क्या क्या कहूं तुझे
 

कह लेगी सब कुछ उनके सना ख्वान की खामुशी,

चुप हो रहा हूं कह के मैं क्या क्या कहूं तुझे
 

लेकिन रज़ा ने खत्म सुखन इस पे है कर दिया,

खालिक का बंदा खल्क का आका कहूं तुझे

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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