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धूम है हर तरफ़ शाह-ए-अबरार की | आज आमद हुई मेरे सरकार की

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धूम है हर तरफ़ शाह-ए-अबरार की | आज आमद हुई मेरे सरकार की

मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा !
मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा !

धूम है हर तरफ़ शाह-ए-अबरार की
आज आमद हुई मेरे सरकार की

आज ख़ुश है हलीमा बी
सब के दिलदार आए हैं
सब ग़रीबों, यतीमों के
आज ग़म-ख़्वार आए हैं

धूम है हर तरफ़ शाह-ए-अबरार की
आज आमद हुई मेरे सरकार की

हर तरफ़ इक हसीं नूर है
और तजल्ली भी भरपूर है
'ईद मँगतों की होने लगी
ऐसे ग़म-ख़्वार आए हैं

धूम है हर तरफ़ शाह-ए-अबरार की
आज आमद हुई मेरे सरकार की

ये तो बोले हैं रूह-उल-अमीं
आप जैसा कोई भी नहीं
खिल गई जिस से हर इक कली
ऐसे गुलज़ार आए हैं

धूम है हर तरफ़ शाह-ए-अबरार की
आज आमद हुई मेरे सरकार की

मंसब है जुदा जिन का
मज़हर है गदा जिन का
दीन पे उन के क़ाइम रहूँ
ऐसे शाहकार आए हैं

धूम है हर तरफ़ शाह-ए-अबरार की
आज आमद हुई मेरे सरकार की

मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा !
मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा !


शायर:
मज़हर शाह नक़ीबी

ना'त-ख़्वाँ:
हुसैन रज़ा क़ुरैशी
हस्सान रज़ा क़ुरैशी

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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