भाषा:
Get App

खोजें

ये किस शहंशाह-ए-वाला की आमद आमद है | बोलो मरहबा

  • यह साझा करें:
Get it on Google PlayDownload on the App Store
ये किस शहंशाह-ए-वाला की आमद आमद हैये कौन से शह-ए-बाला की आमद आमद हैये आज काहे की शादी है, 'अर्श क्यूँ झूमा

ये किस शहंशाह-ए-वाला की आमद आमद है
ये कौन से शह-ए-बाला की आमद आमद है

ये आज काहे की शादी है, 'अर्श क्यूँ झूमा
लब-ए-ज़मीं को लब-ए-आसमाँ ने क्यूँ चूमा

रुसुल उन्हीं का तो मुज़्दा सुनाने आए हैं
उन्हीं के आने की ख़ुशियाँ मनाने आए हैं

फ़रिश्ते आज जो धूमें मचाने आए हैं
उन्हीं के आने की शादी रचाने आए हैं

चमक से अपनी जहाँ जगमगाने आए हैं
महक से अपनी ये कूचे बसाने आए हैं

ये सीधा रास्ता हक़ का बताने आए हैं
ये हक़ के बंदों को हक़ से मिलाने आए हैं

जो गिर रहे थे उन्हें नाइबो ने थाम लिया
जो गिर चुके हैं ये उन को उठाने आए हैं

रउफ़ ऐसे हैं और ये रहीम हैं इतने
कि गिरते पड़तों को सीने लगाने आए हैं

जो गिर रहे थे उन्हें नाइबो ने थाम लिया
जो गिर चुके हैं ये उन को उठाने आए हैं

यही तो सोते हुओं को जगाने आए हैं
यही तो रोते हुओं को हसाने आए हैं

इन्हें ख़ुदा ने किया अपने मुल्क का मालिक
इन्हीं के क़ब्ज़े में रब के ख़ज़ाने आए हैं

जो चाहेंगे, जिसे चाहेंगे ये उसे दें गे
करीम हैं ये ख़ज़ाने लुटाने आए हैं

सभी रुसुल ने कहा, इज़्हबू इला ग़ैरी
अना लहा का ये मुज़्दा सुनाने आए हैं

'अजब करम है कि ख़ुद मुजरिमों के हामी हैं
गुनहगारों की ये बख़्शिश कराने आए हैं

ये आज तारे ज़मीं की तरफ़ हैं क्यूँ माइल
ये आसमान से पैहम है नूर क्यूँ नाज़िल

ये आज क्या है ज़माने ने रंग बदला है
ये आज क्या है कि 'आलम का ढंग बदला है

सुनोगे 'ला' न ज़बान-ए-करीम से, नूरी !
ये फ़ैज़-ओ-जूद के दरिया बहाने आए हैं

नसीब तेरा चमक उठा देख तो, नूरी !
'अरब के चाँद लहद के सिरहाने आए हैं


शायर:

मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान नूरी

ना'त-ख़्वाँ:

ओवैस रज़ा क़ादरी
अब्दुल हबीब अत्तारी
मौलाना बिलाल रज़ा क़ादरी

Muslim Life Pro App
Download
WhatsApp Group
Join Now