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या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर

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या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर

या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर
अस्सलातु वस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह
 
सब गुलामों का भला हो, सब करें तयबाह की सैर
 
या खुदा आलम में ऊँचा परचम-ए-इस्लाम हो
दुश्मनांन-ए-दीं मुसलमानों से हो मग्लूबो ज़ैर
 
या नबी तेरी दुहाई, आफतों में गीर गया
रुख बदल दे मुश्किलों का, और बलाएं मुझसे फेर
 
गुम्बद-ए-ख़ज़रा को देखे एक अरसा हो गया
कब खुलेगी मेरी क़िस्मत, अब लगेगी कितनी देर
 
काश शहादत का मदीने में अता हो जाए जाम
जलवा-ए-महबूब में अंजाम हो मेरा ब-खैर
 
जाम ऐसा अपनी उल्फत का पिलादे साकिआ
नात सुनकर हालत-ए-अत्तार हो रो रो के गैर

यही लिरिक्स अलग अंदाज़ में:

बतला दो गुस्ताख़-ए-नबी को
गैरत-ए-मुस्लिम ज़िंदा है
दीन पे मर मिटने का जज़्बा
कल भी था और आज भी है
 
अस्सलामतु वस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह
 
मैं वो सुन्नी हूँ जमील-ए-क़ादरी मरने के बाद
मेरा लाशा भी कहेगा अस्सलातु वस्सलाम
 
या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर
अस्सलामतु वस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह
 
लब पे नात-ए-पाक का नग़मा, कल भी था और आज भी है
मेरे नबी से मेरा रिश्ता, कल भी था और आज भी है
 
या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर
अस्सलामतु वस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह
 
या रसूलल्लाह के नारे से हमको प्यार है
हमने ये नारा लगाया, अपना बेडा पार है
 
या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर
अस्सलामतु वस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह
 
मेरे लहू का कतरा कतरा बोले या रसूल
मेरे वतन का बच्चा बच्चा बोले या रसूल
 
या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर
अस्सलामतु वस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह
 
बूत-शिकन आया ये कहकर, सर के बल बूत गीर गए
झूम कर कहता था काबा, अस्सलातु वस्सलाम
 
या रसूलल्लाह तेरे चाहने वालों की खैर
अस्सलामतु वस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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