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या शह-ए-बहर-ओ-बर हो करम की नज़र | सब की बिगड़ी बनाना तेरा काम है

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या शह-ए-बहर-ओ-बर हो करम की नज़र | सब की बिगड़ी बनाना तेरा काम है

या शह-ए-बहर-ओ-बर ! हो करम की नज़र
सब की बिगड़ी बनाना तेरा काम है
ठोकरें खा के गिरना मेरा काम है
हर क़दम पर उठाना तेरा काम है

तेरे क़दमों में आना मेरा काम था
मेरी क़िस्मत जगाना तेरा काम है
मेरी आँखों को है दीद की आरज़ू
रुख़ से पर्दा उठाना तेरा काम है

तेरी चौखट कहाँ और कहाँ ये जबीं
तेरे फ़ैज़-ओ-करम की तो हद ही नहीं
जिन को दुनिया में ना कोई अपना कहे
उन को अपना बनाना तेरा काम है

बाड़ा बटता है सुल्तान-ए-कौनैन का
सदक़ा मौला 'अली, सदक़ा हसनैन का
सदक़ा ख़्वाजा पिया, ग़ौस-ए-सक़लैन का
हाज़री हो गई ये भी इन'आम है

मेरे दिल में तेरी याद का राज है
ज़ेहन तेरे तसव्वुर का मोहताज है
इक निगाह-ए-करम ही मेरी लाज है
लाज मेरी निभाना तेरा काम है

तोशा-ए-आख़िरत है सना-ख़्वान का
ज़िक्र करता रहे तेरे फ़ैज़ान का
तेरी ना'तें सुनाना मेरा काम है
सुन के तयबा बुलाना तेरा काम है

साक़िया ! जान क़ुर्बां तेरे जाम पर
हो निगाह-ए-करम अपने ख़ुद्दाम पर
छोड़ दी हम ने कश्ती तेरे नाम पर
अब किनारे लगाना तेरा काम है

फ़ैज़ जारी तेरा ता-क़यामत रहे
तेरी नबियों पे क़ाइम इमामत रहे
तेरी महबूब चौखट सलामत रहे
गंज-ए-रहमत लुटाना तेरा काम है

पेश हर आरज़ू हर तमन्ना करो
थाम लो जालियाँ, इल्तिजाएँ करो
माँगने वालो ! दामन कुशादा करो
प्यारे आक़ा का फ़ैज़-ओ-करम आम है


ना'त-ख़्वाँ:

क़ारी रिज़वान ख़ान
हाफ़िज़ फ़ैसल

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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