ज़हे-क़िस्मत जो आ जाए क़ज़ा आक़ा की चौखट पर
मुकम्मल मौत का आए मज़ा आक़ा की चौखट पर
ख़ता है 'इश्क़ तो सूली चढ़ा दो शौक़ से मुझ को
मगर ये शर्त है देना सज़ा आक़ा की चौखट पर
मदीने से जो हो कर आए हैं वो ये बताते हैं
अदब के साथ चलती है हवा आक़ा की चौखट पर
तमन्ना है दिल-ए-शारिक़-रज़ा की, हो ख़ुदा पूरी
अदब से ये करे मदह-ओ-सना आक़ा की चौखट पर
मुकम्मल मौत का आए मज़ा आक़ा की चौखट पर..
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