ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकारा | ले हम भी हैं सफ़-आरा / Ai Dushman-e-Deen Tune Kis Qaum Ko Lalkaara | Le Ham Bhi Hain Saf-aara
मंज़िल मिले उस राह की पहचान इश्क़ हैआँखों में हसरतों की जगह पर उम्मीद होहो जिस से भला सबका कुछ ऐसी नवीद हो
रमजान महेरबान रमजान महेरबानरमजान महेरबान रमजान महेरबानरमजान महेरबान है रमजान महेरबानइस्लाम की पहचान है रमजान महेरबान















