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उस रब्बे दो आलम की अत सब के लिए है

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उस रब्बे दो आलम की अत सब के लिए है

उस रब्बे दो आलम की अत़ा सब के लिए है

ये चांद ये सूरज ये ज़िया सब के लिए है

 

महदूद नहीं है ये किसी एक बशर तक

ये फूल ये खुशबू ये फ़िजा सब के लिए है

 

उस रब्बे दो आलम की अत़ा सब के लिए है

 

वो कौन है झुटलाये जो इस शान ए करम को

अल्लाह की रह़मत की घटा सब के लिए है

 

उस रब्बे दो आलम की अत़ा सब के लिए है

 

जो ज़र्रे को खुर्शीद बना देती है पल में

उसकी वो मोह़ब्बत की अदा सब के लिए है

 

उस रब्बे दो आलम की अत़ा सब के लिए है

 

जो फूल खिला देती है पथरीली ज़मीं में

सावन की भी पुरकैफ़ हवा सब के लिए है

 

उस रब्बे दो आलम की अत़ा सब के लिए है

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Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

KI MUHAMMAD ﷺ SE WAFA TU NE TO HUM TERE HAIN,YEH JAHAN CHEEZ HAI KYA, LAUH O QALAM TERE HAIN.

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