पहले तो ये समझ लीजिए कि तहज्जुद असल में है क्या। ये एक नफ्ल नमाज़ है, यानी ऐसी नमाज़ जो फर्ज़ नहीं है
अस्सलामु अलैकुम वा रहमतुल्लाही वा बरकातुहू, अजीज़ कारीन-ए-नज़र, आज हम आप के साथ एक निहायत ही अहम और फज़ीलत वाले मौज़ू पर गुफ्तगू करेंगे
तहज्जुद की नमाज़ इस्लाम में एक निहायत ही अहम और फज़ीलत वाली नफ्ल नमाज़ है। यह वो नमाज़ है जिसे अल्लाह तआला ने इस नमाज़ को कुरान-ए-करीम में खास तौर पर ज़िक्र फरमाया है:
22 Rajab Fatiha ka Tarika सबसे पहले आप तीन बार दरूद ए इब्राहिम पढ़ें दरूद ए इब्राहिमबिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीमअल्लाहुम्मा सल्ली अला मुहम्मद वा अला आली कमा सल्लैता अला इब्रहिमा वा अला आली इब्रहिमा इन्नका हम
लिखा है इक ज़ईफ़ा थी जो मक्का में रहती थीवो इन बातों को सुनती थी मगर खामोश रहती थी
दम दम 'अली 'अली दम दमदम दम 'अली 'अली दम दमदिल के हो गर अमीर तो बोलो 'अली 'अलीसोया नहीं ज़मीर तो बोलो 'अली 'अली
Duas for 3 Ashras of Ramadan / रमज़ान के 3 अशरे की दुआ1st Ashra (Days of Mercy & Blessings) / पहला अशरा (यानि रमज़ान के पहले 10 दिन) ये अशरा रहमत का हैرَبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
मदीने वाले का जो भी ग़ुलाम हो जाएक़सम ख़ुदा की वो 'आली-मक़ाम हो जाए
















