• author
    Mohammad Wasim
  • 04/03/2025
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या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहा

या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहानूर के मोतियों की लड़ी बन गईआयतों से मिलाता रहा आयतेंफिर जो देखा तो ना'त-ए-नबी बन गई

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    Mohammad Wasim
  • 04/03/2025
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ज़िंदगी याद-ए-मदीना में गुज़ारी सारी

ज़िंदगी याद-ए-मदीना में गुज़ारी सारी'उम्र भर की ये कमाई है हमारी सारी

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    Mohammad Wasim
  • 24/02/2025
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ज़माने के हर इक वली ने कहा मुझे तो अली चाहिए

ज़माने के हर इक वली ने कहामुझे तो 'अली चाहिएजो हैं हर ज़माने के मुश्किल-कुशा

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    Mohammad Wasim
  • 24/02/2025
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ज़िक्र है आज उस शाह-ए-जीलान का मरहबा मरहबा

मीराँ मीराँ मीराँ मीराँ हमारी है दु'आ, शह-ए-ग़ौस-उल-वरा हरा भरा रहे ये क़ादरी चमन

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    Mohammad Wasim
  • 22/02/2025
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बेहरे दीदार मुश्ताक़ है हर नज़र, दोनों आलम के सरकार आ जाइये

आक़ा आ जाइये आक़ा आ जाइयेआक़ा आ जाइये आक़ा आ जाइयेबेहरे दीदार मुश्ताक़ है हर नज़रदोनों आलम के सरकार आ जाइये

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    Mohammad Wasim
  • 17/02/2025
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    Mohammad Wasim
  • 15/02/2025
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ज़हे-क़िस्मत जो आ जाए क़ज़ा आक़ा की चौखट पर

ज़हे-क़िस्मत जो आ जाए क़ज़ा आक़ा की चौखट परमुकम्मल मौत का आए मज़ा आक़ा की चौखट पर

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    Mohammad Wasim
  • 07/02/2025
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शब ए बारात की नफिल नमाज पढ़ने का तरीका

शब-ए-बारात के आमाले नवाफिलरोज़े की फजीलतः शाबान की 15 तारीख को रोज़ा रखने की बड़ी फजीलत है।

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    Mohammad Wasim
  • 07/02/2025
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दुआ-ए-निस्फ़-ए-शाबान