वक़्त सहरी का हो गया जागोनूर हर सिम्त छा गया जागो उठो सहरी की करलो तैयारीरोज़ा रखना है आज का जागो
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानीया अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाहया अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
वो है मेरा नबी, कमली वाला नबीज़मीं तेरा दामन भी पढ़ जाएगा कमवो सरवर की ताज़ीम लिख न सकेंगे
तेरी जालियों के निचे, तेरी रहमतों के सायेजिसे देखनी हो जन्नत, वो मदीना देख आये
चिरागे चिश्त शहे औलिया गरीब नवाज़मेरे हुज़ूर मेरे पेशवा गरीब नवाज़तेरी शान ख्वाजा-इ-ख्वाजगांतू बड़ा गरीब नवाज़ है
तारु 'अरब लागे रे खजूर खजूरतारु नाम लागे रे मधुर मधुरमने बोलावी ल्यो, मदीनाहाँ ! मदीना वाड़ा हुज़ूर हुज़ूर
शुक्रिया, अए हाफ़िज़ों ! इस्कार हो करते अदाहिफ़्ज़-ए-क़ुरआन के लिए अल्लाह ने तुमको चुनादस 'अज़ीज़ों की सिफ़ारिश का तुम्हें मुअज़्दा मिलाइस से बढ़कर हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन का भला क्या हो सिला
वो ख़ुदा है ख़ुदा बादशाह वो ख़ुदासारी दुनिया को चलाता है ख़ुदारात से फिर दिन को लाता है ख़ुदा
सरकार-ए-ग़ौस-ए-आज़म ! नज़रे करम खुदारसरकार-ए-ग़ौस-ए-आज़म ! नज़रे करम खुदारामेरा खाली कासा भर दो, में फ़कीर हूँ तुम्हारा
















