• author
    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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सर-ए-महफ़िल करम इतना मेरी सरकार हो जाए

सर-ए-महफ़िल करम इतना मेरी सरकार हो जाएनिगाहें मुन्तज़िर रह जाएं और दीदार हो जाएतसव्वुर में तेरी हर शय पे यूँ नज़रें जमाता हूँ

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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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हसरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानी

सरदार-ए-औलिया हैं मेरे गौस पिया जिलानीवो महबूब-ए-सुब्हानी , शहबाज़-ए-ला-मकानीवो किन्दील-ए-नूरानी

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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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सदा ग्यारवीं हम मनाते रहेंगे

ग्यारवीं वाले मेरे ग्यारवीं वालेइमदाद कुन इमदाद कुन अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुनदर दीं और दुनिया शाद कुन या ग़ौसे आज़म दस्तगीर

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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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सरे शाम ही से फलक के सितारे

सरे शाम ही से फलक के सितारेयही कह रहे हैं चमकते चमकतेदिखाएंगे शाम-ओ-कमर को भी आंखेंमदीने के ज़र्रे दमकते दमकते

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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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सुनते हैं के महशर में सिर्फ उनकी रसाई है

सुनते हैं के महशर में सिर्फ उनकी रसाई हैगर उनकी रसाई है लो जब तो बन आई हैमचला है के रहमत ने उम्मीद बंधाई हैक्या बात तेरी मुजरिम क्या बात बनाई है

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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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Rehte Hein Mere Dil Mein Armaan Madine Ke
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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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Ramzan e Madina
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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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रमजान इश्क़ है

मंज़िल मिले उस राह की पहचान इश्क़ हैआँखों में हसरतों की जगह पर उम्मीद होहो जिस से भला सबका कुछ ऐसी नवीद हो

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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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Ramzaan Hai Allah ki Qurbat ka Mahina
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    Mohammad Wasim
  • 04/12/2024
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रमजान महेरबान है

रमजान महेरबान रमजान महेरबानरमजान महेरबान रमजान महेरबानरमजान महेरबान है रमजान महेरबानइस्लाम की पहचान है रमजान महेरबान

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    Mohammad Wasim
  • 03/12/2024
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रब्बा मेरेयां नसीबां विच हज कर दे

पाँवे कल कर देते पाँवे आज कर देरब्बा मेरेयां नसीबां विच हज कर दे

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    Mohammad Wasim
  • 03/12/2024
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रश्के कमर हूँ रंगे रूखे आफताब हूँ | ज़र्रा तेरा जो अये शहे गर्दो जनाब हूँ

रश्के कमर हूँ रंगे रूखे आफताब हूँज़र्रा तेरा जो अये शहे गर्दो जनाब हूँदर्रे नजफ़ हूँ गोहरे पाके खुशाब हूँयानी तुराबे रह-गुज़रे बु-तुराब हूँ